Tuesday, 11 September 2012

शिव आराधना

नमामिशमीशान निर्वांरूपम \ विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं \ चिदा काश शवाषम भजेहुम
निराकार्मोकार्मुलम तुरियम

Thursday, 26 March 2009

हिंदू नव वर्ष


सभी ब्लॉग के दोस्तों को नव वर्ष की
शुभ कामना

Monday, 23 March 2009

जिन्दगी के सफ़र में कुछ समय सुहाने पलों के लिए,
व्यक्ति न जाने क्या क्या इन्हे पाने के लिए,
कर्म करता हे किंतु उन कर्मो का लेखा रखने के लिए ,
उसके पास समय ही नही बचता हे की ,जीवन के सुंदर पलों को पाने के लिए ,
कितनी बार अपने आप को धोका दिया नही गिनती कर पता हे.

Saturday, 7 March 2009

होली


सभी दोस्तो को "होली" के पावन पर्व की ,
शुभ कामना

Saturday, 7 February 2009

Wednesday, 14 January 2009

मधुर पल

जीवन के मधुर पल, याद रखे जाते हे।
उन पलों को कंही कैमरे में ,कैद किए जाते हे।
तो कंही सफ़ेद पन्नो पर , उकेरा जाता हे।
कभी याद आने पर, उनको देखकर या ,पढकर याद किया हो।
किंतु कोई भी मधुर पल,खुशी कम टीस ज्याद्दा देते हे।
कोई भी याद सिर्फ़ दर्द दे सकती हे,सुकून नही दे सकती हे।
किसी भी मधुर याद का साथ छूट जाए तो भूल जाना हे ,

नही दीखता हे ,लेकिन होता हे


भले हे भोतिक चींजो का , बदलाव नही दीखता हो,
लेकिन होता हे
भले ही मानव स्वाभाव का,बदलाव नही दीखता हो ,
लेकिन होता हे.
भले हे सर्जन का अंदाज़ ,आकलन नही दीखता हो ,
लेकिन होता हे.

Friday, 9 January 2009

चुटकुले



गर्ल फ्रेंड
वही जो टोक टोक कर दो साल में आपकी आदत बदल दे
ओर दो साल बाद कहे .............
तुम अब पहले जैसे नही रहे.
२.
पेट्रोल पम्प
पत्नी.चलो आज किसी महेंगी जगह चलते हे '
पति। चलो \
पत्नी। लेकिन कंहा
पति, पेट्रोल पम्प।
चपल
लड़की को सामने से आता देखकर लड़का सिटी बजता हे
तमतमाकर लड़की ने कहा - चपल निकालू क्या।
लड़का- मेरा दिल कोई मन्दिर नही हे
आप तो चपल पहेनकर भी आ सकती हे.|

Thursday, 8 January 2009

ॐ साईं नाथ ,
इस समय जो देश की व्यवस्था को न जाने किसकी नज़र लगी हे /
मानव जीने के लिए जो भी प्रयत्न करता हे उसमे जो तकलीफे सामना /
करना पड़ती हे उसका कोई भी हल नही निकल पा रहा हे।

क्या ऐसा लगता हे की जो राजनितिक माहोल हे वह आम आदमी के
मतलब का नही हे /हम जिस व्यक्ति के हाथ में देश की बागडोर थमा देते हे /
वह क्या अपने मतलब के लिए कितने प्रपंच करता हे कल की न्यूज़ की प्रमुख खबर थी
की लखनऊ से "श्री संजय दत्त" को लोकसभा का दावेदार "समाजवादी "पार्टी बना रही हे /
क्या आम आदमी से उसको लागाव हो सकता हे .वह या तो अपने कोर्ट के फैसले को अपने पक्ष में/
करने के लिए "राजनितिक" रसूख बनाना चाहते होंगे .ऐसा इस कारन से लगता हे जिसने आज तक कभी
जनता के लिए ऐसा कुच्छ भी नही किया जो आम व्यक्ति के फायदे का हो।
ऐसा मेरा विचार हे ।

Saturday, 3 January 2009


A GOOD RELATION IS LIKE A "BIRD",
IF YOU CATCHTIGHTLY IT "DIES",
IF YOU CATCH IT LOOSLY IT "FLIES"
BUT YOU CATCH "AFFECTIONATELY"
IT REMAINS WITH YOU FOREVER,

Wednesday, 10 December 2008

नो का आदर्श

महांकाल
आदिकवि ने शुरू की ,वंदना महाकाल की

अहसास से हृदय भरा ,कूंच व्यथा तत्काल की

समय बिता शुरू हुआ ,अर्चन कालिदास का

भावः विव्हल श्रृंगार था ,महाकाल विन्यास का

कनिष्ठिका आसीन था,महाकाल का ये दास

माँ काली का वरद था , महाकवि कालिदास

काल गणना के दूर में , कवि सुमन भी आ गए

शिव मंगल में हो अर्पित ,कलि काल में समां गए

महाकाल का एक पल प्रचलित हे अविकल

गिनती करके चूक गए ,फिर भी जारी हे हलचल

इस गणना में आ रहा ,नव वर्ष भावः विभोर

नव नो की नवीनता से,मंगल मये चित चोर.

Tuesday, 9 December 2008

Sunday, 5 October 2008

मानव की इच्छा

मानव हमेशा यह इच्छा रखता हे की में किसी के दुःख में काम आ सकू ।
किंतु आज इस सोच की कमी महसूस होती हे क्योकि मानव आज किसी से
भी ,विनम्रता से बात तो कर नही पता हे क्या उम्मीद की जा सकती हे की वह
किसी के काम आ सकेगा ।
आज मानव अपने में जो बदलाव महसूस करता हे उसके लिए आज का वातावरण दोषी
ही लगता हे।
प्रेम एक ऐसा शब्द हे की किसीको भी अपने प्रति समर्पित कर सकता हे यदि मानव मानव से प्यार से
नही रह सकता हे तो वह इश्वेर से क्या प्रेम रख सकेगा /इश्वेर के प्रति झूठी आस्था दिखाकर क्या साबित करना
चाहता हे .क्योंकि सभी मानव सिर्फ़ धन ,वैभव के लालच में पड़ा हे क्या अपनी नियमित जररूत के अतरिक्त
धन सिर्फ़ और सिर्फ़ मानव की झूठी शान बढाने वाला रह गया हे

Monday, 22 September 2008

सम्बन्ध


जीवन के मधुर पल वही हो जिसमे कोई अपना कहलाने लायक हो।

कभी तो समय मधुर याद में खोया हुआ ,कभी गम से भरा हुआ

जीवन की मधुरता के पल की खोज में सिर्फ़ गम ही हाथ लगते हे

ऐसा क्या हे की स्वार्थ में अपने भी पराये हो जाते हे ।

कोई सम्बन्ध तो निस्वार्थ होगा .वही निस्वार्थ अपनेपन की खोज में ...............

Saturday, 20 September 2008

RAJENDER DAVE: आतंकवाद

RAJENDER DAVE: आतंकवाद

आतंकवाद

यह आतंकवाद इस दुनिया में क्या करना चाहता हे ?
क्या हिंदू क्या मुस्लमान कल इस्लामाबाद में जो हुआ वह
दरिंदगी की पराकाष्ठा नही हे.आतंकी का जब भी नाम आता हे तो वह मुस्लिम होता हे।
इस्लाम के इन पाक दिनों में क्या यह सब ठीक हे मेरे जानकारी में तो "रमजान"का महिना तो
सिर्फ़ खुदा की इबादत का हे ऐसा मेरे मुस्लिम दोस्त कहते हेई,क्या यह इबादत हे ,उन दरिंदो
के मन में क्या खुदा का डर नही .एक तरफ़ तो कहते हें की हम इस्लाम को बचाना चाहते हें
दिन पैर दिन न्यूज़ में दुनिया में किसी न किसी आतंकी घटना का जिक्र सुनने को मिलता हें
दुनिया में अमन चैन का कोई तो रास्ता होगा ।

Tuesday, 2 September 2008

जीवन का सफ़र


जीवन एक मधुर अहसास
कितना कोमल , कितना नाजुक ,
जो किसी के भी दर्द से दुखी हो उठे ,
जो किसी पराये के सुख दुःख में कम आ सके,
जो किसी भी बात पैर हर्षित होना चाहे
जो मन किसी खुशी के पल को तलाशता रहे,
किसी मधुर पल की राह देखता रहे
किसी पराये को अपना बनाने को देखता रहे।

" पप्पू ".